Tuesday, 27 September 2016

आधा - पौना

सुबह - सुबह जब होश ने आकर नींद को अलविदा कहा, तो ज़हेन में एक ख्वाब चल रहा था, ख्वाब तो अधूरा ही रह गया, या शायद पौना हो चुका हो |

सोचा ख्वाब पूरा करें, नींद मे ना हो पाया तो हक़ीकत मे ही सही| पूरे दिन कोशिश की, जी- तोड़ | पर आधा-पौना ख्वाब, कभी हक़ीक़त मे पूरा हो सकता है? रात को फिर ज़हेन कुछ चलने लगा, यही उधड़ी सी आधी पौनी कविता :-


आधी - पौनी सी रात है,
आधा - पौना सा साथ है,
आधा - पौना सब इधर- उधर, आधी - पौनी सी बात है |

आधा - पौना सा वादा है,
जो खुद से अभी निभाना है,
आधी - पौनी सी बातें हैं, जो खुद से करते जाना है |

आधे - पौने से किस्से में,
इस जिंदगी को समाना है,
आधी - पौनी सी नींदों में, नये ख्वाबों को सजाना है |

आधा - पौना सा दर्द कोई,
इस दर्द में जलते जाना है,
आधी - पौनी सी खुशियों में, खिलखिलाहट को बसाना है |

आधे - पौने से सुर हैं काई,
आधे -पौने से बोल हैं,
आधा - पौना सब मिला-जुला, आधा - पौना एक गाना है |

 

पुनश्च : कविता भी आधी ही है, या शायद पौनी हो चुकी है

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